शायरी की दुनिया में rahat indori shayari का जादू कुछ ऐसा है, जो दिल के सबसे गहरे एहसासों को बयां करने की ताकत रखता है। चाहे दर्द हो, आशिक़ी हो या ज़िंदगी के रंग—राहत इंदौरी की शायरी हर पल में एक नयी गूंज छोड़ती है। अगर आप ऐसे शायर की तलाश में हैं, जो हर शेर से आत्मा को झकझोर दे, तो आपकी खोज यहीं पूरी होती है।
Rahat Indori Shayari

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए

न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ
रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया
ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो

मैं मर जाऊँ तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना
लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है
मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी

सूरज सितारे चाँद मिरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे
मिरी ख़्वाहिश है कि आँगन में न दीवार उठे
मिरे भाई मिरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले
बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

तेरी महफ़िल से जो निकला तो ये मंज़र देखा
मुझे लोगों ने बुलाया मुझे छू कर देखा
एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो
मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए

मैं पर्बतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते
बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो
इक मुलाक़ात का जादू कि उतरता ही नहीं
तिरी ख़ुशबू मिरी चादर से नहीं जाती है
रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है

मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को
समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे
तुझ से मिलने की तमन्ना भी बहुत है लेकिन
आने जाने में किराया भी बहुत लगता है
मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ
यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे
एक बार इन्हें भी पढ़ें
तो दोस्तों, बस इतना ही! उम्मीद है कि Shayari Path पर साझा की गई rahat indori shayari ने आपके दिल को छू लिया होगा और आपकी भावनाओं को शब्दों में पिरो दिया होगा। चाहे दर्द की गहराई हो, इश्क़ की मस्ती हो या ज़िंदगी के फलसफे—ये शायरी हर मोड़ पर आपका साथी बनेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राहत इंदौरी शायरी क्या है?
राहत इंदौरी की शायरी उर्दू-हिंदी साहित्य की एक अनमोल धरोहर है, जो प्रेम, दर्द, विद्रोह और जीवन दर्शन से भरी हुई है। उनके शेर दिल को छूने वाले और प्रेरणादायक होते हैं, जो काव्य प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।
राहत इंदौरी कौन थे?
राहत इंदौरी एक प्रसिद्ध उर्दू शायर थे, जिनकी शायरी में भावनाओं की गहराई और सामाजिक मुद्दों का समावेश होता था। उन्होंने मुशायरों में अपनी अनूठी अदा से लाखों दिल जीते।
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