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    Home - Life Shayari - 30+ Best Allama Iqbal Shayari – अल्लामा इक़बाल के शेर
    Life Shayari

    30+ Best Allama Iqbal Shayari – अल्लामा इक़बाल के शेर

    PriyaBy PriyaOctober 8, 2025
    Allama Iqbal Shayari

    क्या आपने कभी ऐसे शेर सुने हैं जो सिर्फ़ दिल को नहीं, बल्कि सोचने का नज़रिया भी बदल दें? अगर हां, तो यक़ीनन आपने Allama Iqbal Shayari का जादू महसूस किया होगा। उर्दू और फ़ारसी दुनिया के इस बेमिसाल शायर ने अपने अल्फ़ाज़ों में सिर्फ मोहब्बत नहीं, बल्कि ज़िन्दगी का असली मक़सद समेटा है।

    Allama Iqbal Shayari – अल्लामा इक़बाल के शेर

    Allama Iqbal Shayari

    माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
    तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

    ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
    ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

    हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
    बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

    तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
    तिरे सामने आसमाँ और भी हैं

    नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर
    तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में

    सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
    अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

    Allama Iqbal Shayari

    मस्जिद तो बना दी शब भर में ईमाँ की हरारत वालों ने
    मन अपना पुराना पापी है बरसों में नमाज़ी बन न सका

    अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन

    दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब
    क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो

    नहीं है ना-उमीद ‘इक़बाल’ अपनी किश्त-ए-वीराँ से
    ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रख़ेज़ है साक़ी

    ऐ ताइर-ए-लाहूती उस रिज़्क़ से मौत अच्छी
    जिस रिज़्क़ से आती हो परवाज़ में कोताही

    अमल से ज़िंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भी
    ये ख़ाकी अपनी फ़ितरत में न नूरी है न नारी है

    Allama Iqbal Shayari

    न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो
    तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में

    वजूद-ए-ज़न से है तस्वीर-ए-काएनात में रंग
    इसी के साज़ से है ज़िंदगी का सोज़-ए-दरूँ

    तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
    मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

    दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
    पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है

    नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
    मज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

    मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
    हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

    Allama Iqbal Shayari

    फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का
    न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है

    यूँ तो सय्यद भी हो मिर्ज़ा भी हो अफ़्ग़ान भी हो
    तुम सभी कुछ हो बताओ तो मुसलमान भी हो

    उक़ाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में
    नज़र आती है उन को अपनी मंज़िल आसमानों में

    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल
    लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे

    बे-ख़तर कूद पड़ा आतिश-ए-नमरूद में इश्क़
    अक़्ल है महव-ए-तमाशा-ए-लब-ए-बाम अभी

    जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी
    उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो

    Allama Iqbal Shayari

    ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें
    जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें

    यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
    जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें

    हरम-ए-पाक भी अल्लाह भी क़ुरआन भी एक
    कुछ बड़ी बात थी होते जो मुसलमान भी एक

    बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी
    मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है

    वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है
    तिरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में

    जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में
    बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते

    तो दोस्तों, उम्मीद है कि आपको Allama Iqbal Shayari पसंद आई होगी और इक़बाल के इन अनमोल शेरों ने आपके दिल में नया जोश और सोच की नयी लौ जलाई होगी। Life Shayari Read का मकसद सिर्फ़ शायरी बाँटना नहीं — बल्कि ज़िन्दगी को बेहतर महसूस करवाना है।

    हमारी कोशिश हमेशा यही रहती है कि आपको ऐसा कंटेंट मिले जो विश्वसनीय (Trustworthy) हो, अनुभव और गहराई (Experience & Expertise) से भरा हो और शायरी की असली रूह तक पहुँचाए।

    अपनी पसंदीदा शायरी चुनिए, दिल से महसूस कीजिए और दूसरों के साथ शेयर कीजिए।
    क्योंकि यहाँ – शब्द नहीं, एहसास लिखे जाते हैं!

    ||शायरी प्रिय लोगो के लिए विशेष संग्रह सिर्फ  Love Shayari Path पर, अपनी एक नज़र ज़रूर डालें ||

    Allama Iqbal Shayari
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